थायराइड एक ऐसी समस्या है जिससे पूरे विश्व में बहुत सारे लोग प्रभावित हैं। ये बीमारी पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में देखी जाती है। थायरायड ग्रंथि गले में सांस नली के ऊपर, वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में होती है। इसका आकार तितली जैसा होता है। ये ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है। इस हार्मोन से शरीर की एनर्जी, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता कंट्रोल होती है।
थायराइड की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिए इसकी वजह से शरीर में कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जब थायराइड ग्रंथि ज्यादा मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाने लगती है तो इसे हाइपरथायराडिज्म कहते हैं जबकि हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड हार्मोन के स्तर में कमी होती है। महिलाओं में कुछ सामान्य लक्षणों के द्वारा इस बीमारी को पहचाना जा सकता है। अगर सही समय से इस बीमारी का पता चल जाए तो इसका इलाज अच्छी तरह किया जा सकता है।
थायराइड के लिए जड़ी बूटी :-
थायराइड में हार्मोनल ग्रंथि को स्वस्थ व संतुलित बनाये रखने के लिए कुछ जड़ी बूटियां उपयोगी साबित हो सकती है। थायराइड ग्रंथि के ठीक से काम न करने से रक्त में थायराक्सिन नामक हार्मोन का स्तर पर प्रभाव पड़ता है। इस महत्वपूर्ण हार्मोनल ग्रंथि को स्वस्थ व संतुलित बनाये रखने के लिए कुछ जड़ी बूटियां उपयोगी साबित हो सकती है।
अश्वगंधा :-
अश्वगंधा एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसमें मौजूद एंटीऑक्सीरडेंट गुण हार्मोन की सही मात्रा में उत्पादन कर थायराइड को रोकने का कम काम करता है। हार्मोन संतुलन के साथ, अश्वगंधा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव के कारण यह प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार कर तनाव से मुक्ति दिलाता है।
गेहूं का ज्वाररा :-
गेहूं का ज्वाररा प्रकृति की अनमोल देन है। इसमें अनेक औषधीय और रोग निवारक गुण पाए जाते हैं। गेहूं का ज्वाारा रक्त व रक्त संचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, उच्च रक्तचाप, सर्दी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, पाचन संबंधी रोग और थायराइड ग्रंथि के रोग में काम आता है।