ब्रिटिश रिसर्चर विशालकाय रिसर्च की तैयारी में हैं कि क्या मोबाइल फोन या दूसरे वायरलेस उपकरणों से बच्चों के दिमाग के विकास पर भी असर पड़ता है? मोबाइल के इस्तेमाल से मस्तिष्क के कैंसर के खतरे पर कई रिसर्च पहले हो चुकी है.
ज्ञान, किशोरावस्था और मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर आधारित ‘स्कैंप’ नाम के इस प्रोजेक्ट में उनकी याद्दाश्त और ध्यान जैसी बातों पर गौर किया जाएगा. देखा जाएगा कि किशोरावस्था में इनका किस तरह विकास होता है. यह ठीक वही समय है, जब किशोर मोबाइल फोन और इसके जैसे अन्य वायरलेस उपकरण इस्तेमाल करना शुरू करते हैं.
कैंसर का खतरा
इस बात के अब तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि मोबाइल से निकलने वाली रेडियो तरंगें स्वास्थ्य पर खराब असर डालती हैं. हालांकि इस बारे में कई रिसर्च की जा चुकी हैं और कई जारी हैं. अब तक ज्यादातर रिसर्चों में वयस्कों पर और उनमें मस्तिष्क के कैंसर के खतरे पर ज्यादा तवज्जो दी जाती रही है.
लेकिन अब वैज्ञानिक ध्यान देना चाहते हैं कि क्या बच्चों के विकसित हो रहे दिमाग को वयस्कों के मुकाबले ज्यादा खतरा हो सकता है? इसकी एक वजह तो यह है कि उनका तंत्रिका तंत्र इस उम्र में विकसित हो रहा होता है. दूसरी वजह यह कि कम उम्र में मोबाइल का इस्तेमाल शुरू करने की वजह से वे मोबाइल की रेडियो तरंगों का ज्यादा लंबे समय तक सामना करते हैं.
बच्चों पर असर
लंदन के इंपीरियल कॉलेज में सेंटर फॉर इंवायरमेंट एंड हेल्थ के निदेशक पॉल एलियट कहते हैं, “अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण वयस्कों के 10 साल तक मोबाइल इस्तेमाल करने के बाद इससे निकलने वाली रेडियो तरंगों और ब्रेन कैंसर के बीच किसी तरह का संबंध नहीं दिखाते हैं.” वह कहते हैं कि, “लेकिन इसके ज्यादा लंबे समय तक इस्तेमाल और बच्चों द्वारा इस्तेमाल के बारे में मौजूदा प्रमाण स्पष्ट नहीं हैं.”
वजन पर दें ध्यान
जन्म के समय जिन बच्चों का वजन चार किलोग्राम या उससे ज्यादा होता है, वह बड़े हो कर मोटापे का शिकार हो सकते हैं. इसीलिए इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि गर्भवती महिलाएं अत्यधिक खानपान से दूर रहें, कसरत करती रहें और उन्हें डायबिटीज न हो.